मैने यह कव्वाली बहुत बार सुनी पर जब कभी भी अपने मित्रों के साथ इस उम्दा शायरी को बाँटना चाहा, उर्दू ज़ुबान की सीमित जानकारी आड़े आ गयी। मैं खुद भी उर्दू का जानकार नहीं हूँ। पर इतना ज़रूर समझता हूँ कि दुनिया की सुनहरी शायरी में से बहुत सारी, उर्दु ज़ुबान में है। इस लिये ‘कोमल वाणी’ के इस प्रसंग में मेरी कोशिश है कि मैं खैलवी साहब कि इस कव्वाली का अपेक्षाक्रित आसान शब्दों में तरजुमा प्रस्तुत करूँ, न सिर्फ़ अपने लिये बल्कि अपने उन सब मित्रों के लिये जो, उर्दु की सीमित जानकारी की वजह से इतनी गहरी और खूबसूरत शायरी से महरूम हैं। क्यों कि मैं खुद उर्दू नहीं जानता, इस लिये ज़ाहिर है कि कहीं कहीं चूक हो जाये। इस के लिये मैं उर्दू ज़ुबान के जानकारों से माफ़ी चाहता हूँ और विनती करता हूँ कि मेरा भूल-सुधार करें।
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कभी यहाँ तुम्हें ढूँढा, कभी वहाँ पहुँचा,
तुम्हारी दीद (glimpse) की ख़ातिर कहाँ-कहाँ पहुँचा
ग़रीब मिट गये, पामाल (vanish) हो गये,
लेकिन किसी तलक न तेरा आज तक निशाँ पहुँचा।
हो भी नहीं और हर जा (place) हो,
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
हर ज़र्रे (every speck) में किस शान से तू जलवानुमा (present with splendour) है,
हैरान है मगर अक्ल कि कैसा है तू क्या है,
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
तुझे दैरो-हरम (places of worship) में ढँढा, तू नहीं मिलता,
मगर तशरीफ़-फ़र्मा (present) तुझे अपने दिल में देखा है
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
ढूँढे नहीं मिले हो, न ढूँढे से कहीं तुम,
और फ़िर यह तमाशा है, जहाँ हम हैं वहीं तुम
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
जब बाजू तेरे कोई दूसरा नहीं मौजूद,
फ़िर समझ में नहीं आता तेरा परदा करना
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
हरमो-दैर में है जलवा-ए-पुरफ़न तेरा
(Your splendour [वैभव] is manifest in all houses of worship)
दो घरों में है, चराग-ए-कुर्खे रौशन तेरा
(Both worlds are radiant with your light)
जो उल्फ़त में तुम्हारी खो गया है, उसी खोये हुए को कुछ मिला है
न बुत-ख़ाने (house of statues), न काबे में मिला है, मगर टूटे हुए दिल में मिला है
अदम (non-existence) बन कर कहीं तू छुप गया है, कभी तू हस्त (existence) बन कर आ गया है
नहीं है तू तो फ़िर इनकार कैसा? नफ़ी (negation) भी तेरे होने का पता है
मैं जिस को कह रहा हूँ अपनी हस्ती, अगर वो तू नहीं तो और क्या है?
नहीं आया ख़यालों में अगर तू, तो फ़िर मैं कैसे समझा तू ख़ुदा है?
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
हैरान हूँ इस बात पे: तुम कौन हो, क्या हो?
हाथ आओ तो बुत, हाथ न आओ तो खुदा हो
(trick of the mind: if one gets Him, He is just a statue, if one doesn’t get, then He is God)
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
अक्ल में जो घिर गया ला-इन्तहा क्योंकर हुआ
(that which can be captured by reason, can not be infinite)
जो समझ में आ गया, फिर वो ख़ुदा क्योंकर हुआ
(that which can be understood by intellect, can not be God)
तुम एक गोरखधन्दा हो
फ़ल्सफ़ी (philosopher) को बहस के अँदर ख़ुदा मिलता नहीं
डोर को सुलझा रहा है, और सिरा मिलता नहीं
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
पता यूँ तो बता देते हो सब को ला-मकाँ (homelessness) अपना
ताज्जुब है मगर रहते हो टूटे हुए दिल में
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
जब कि तुझ बिन कोई नहीं मौजूद, फ़िर ये हँगामा ऐ ख़ुदा क्या है?
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
छुपते नहीं हो, सामने आते नहीं हो तुम, जलवा दिखा के जलवा दिखाते नहीं हो तुम
दैरो-हरम (worship places) के झगड़े मिटाते नहीं हो तुम,
जो अस्ल बात है वो बताते नहीं हो तुम
हैरान हूँ मेरे दिल में समाये हो किस तरह, हालाँकि दो जहाँ में समाते नहीं हो तुम
ये मा-बदो-हरम, ये कलीसा-ओ-दैर (Worship places) क्यों,
हरजाई (unfaithful) हो, तभी तो बताते नहीं हो तुम
तुम एक गोरखधन्दा (puzzle) हो
दिल पे हैरत ने अजब रँग जमा रखा है
(Astonishment has taken a strange possession of my heart)
एक उलझी हुई तस्वीर बना रखा है
कुछ समझ में नहीं आता कि ये चक्कर क्या है
खेल क्या तुम ने अज़्ल से (since the beginning) ये रचा रख है
रूह को जिस्म के पिंजरे का बना कर कैदी, उस पर मौत का पहरा भी बिठा रखा है
दे के तदबीर (self-will) के पँछी को उड़ानें तूने,
दाम-ए-तदबीर में हर सम्त बिछा रखा है
(yet you have spread the net of fate as the price for exercsing free-will)
कर के अर्श-ए-कोनैन की बरसों तूने, ख़्त्म करने का भी मँसूबा बना रखा है
(For years you have decorated this world, yet you have planned its destruction)
ला-मकानी (homelessness) का बहरहाल है दावा भी तुम्हें,
(Though you claim to be homeless)
नहल-ओ-अकरब का भी पैग़ाम सुना रखा है
(yet you have preached home, kith and kin)
ये बुराई, वो भलाई, ये जहन्नुम (hell), वो बहिश्त (heaven/paradise),
इस उलट-फेर में फ़रमाओ तो क्या रखा है?
जुर्म आदम नें किया और सज़ा बेटों को, अद्ल-ओ-इन्साफ़ का मियार भी क्या रखा है!
(For Adam’s crime, his son’s are being punished, what a criteria for your justice!!)
दे के इन्सान को दुनियाँ में ख़िलाफ़त अपनी, इक तमाशा सा ज़माने में बना रखा है
(by appointing man as your deputy on earth, you have made it a spectacle)
अपनी पहचान की ख़ातिर है बनाया सब को, सब की नज़रों से मगर ख़ुद को छुपा रखा है
तुम एक गोरखधन्दा हो
नित नये नख़्श बनाते हो, मिटा देते हो, जाने किस जुर्मे-तमन्ना (sin of desire) की सज़ा देते हो
कभी कँकड़ को बना देते हो हीरे की कनी, कभी हीरों को भी मिट्टी में मिला देते हो
ज़िंदगी कितने ही मुर्दों को अता (bestow) की जिसने, वो मसीहा भी सलीबों (cross) पे सजा देते हो
ख़्वाहिशे-दीद (desire to behold) जो कर बैठे सिरे-तूर (top of Mount Sinai) कोई
(if anyone wishes to behold you on Mount Sinai)
तूर ही बर्के-तज्जली (lightning of manifestation) से जला देते हो
(you turn Mount Sinai into ashes with your manifestation)
नाले नमरूद में डलवाते हो कुदरत ना ख़लीक, ख़ुद ही फिर नार को गुलज़ार बना देते हो
[In Arab tradition there is the story of Abraham. Nimrud tries to burn him to death, but on account of Abraham's faith, the fire becomes a means of safety for Abraham]
चाहे किन आन में फेंको, कभी माह किन्नान,
(Sometimes you throw a Canaanite into a wall of Canaanites)
[Canaan is an ancient term for a region approximating to present-day Israel and the West Bank and Gaza, plus adjoining coastal lands and parts of Lebanon and Syria. Today, Canaanite can describe anything pertaining to Canaan, especially its culture, its languages and its inhabitants. The languages of ancient Ammon and Moab in modern Jordan can be called eastern dialects of Canaanite, although these ethnic groups were not considered Canaanite by the Hebrews.]
नूर याकूब की आँखो का भी बुझा देते हो
(you deprive Jacob of his eye-sight)
दे के युसुफ़ को मिस्र के बाज़ारों में, आख़िरे-कार शाहे-मिस्र बना देते हो
(you put Joseph into Egypt’s slave-mart and then make him the King of Egypt too)
जज़्बो-मस्ती की जो मन्ज़िल पे पहुँचता है कोई,
(when someone arrives at the destination of spirituality)
बैठ कर दिल में अनल-हक़ (I am that) की सदा देते हो
(you sit in his heart and tell him: I am God, I am that)
ख़ुद ही लगवाते हो फिर कुफ़्र (infidelity) के फ़तवे (verdicts) उस पर,
ख़ुद ही मँसूर को सूली पे चढ़ा देते हो
[Mansoor was executed in Baghdad in 309 AH, because he claimed to be a prophet, then he went further and said that he was God. He used to say, “I am Allaah,”]
अपनी हस्ती भी वो इक रोज़ गँवा बैठता है, अपने दर्शन की लगन जिस को लगा देते हो
कोई राँझा जो कभी खोज में निकले तेरी, तुम उसे झँग (a place in Doaba, Punjab) के बेले (charity) में रुला देते हो
जुस्तजू (quest) ले के तुम्हारी जो चले क़ैस कोई, उस को मजनू किसी लैला का बना देते हो
जोत सस्सी के अगर मन में तुम्हारी जागे, तुम उसे तपते हुए थल (desert) में जला देते हो
सोहनी अगर तुम को महिवाल तस्सवुर (imagine) कर ले, उस को बिफ़री हुई लहरों (strong currents) में बहा देते हो
ख़ुद जो चाहो तो सरे-अर्श बुला कर मह्बूब, एक ही रात में मेराज करा देते हो
(and if you wish, you yourself summon and in a single night, make a prophet ascend to the heaven)
आप ही अपना परदा हो,
तुम एक गोरखधन्दा हो
जो कहता हूँ, माना वो तुम को लगता है बुरा सा
फिर भी है मुझे तुम से, बहरहाल (nevertheless) ग़िला (complaint) सा
चुप-चाप रहे देखते तुम अर्शे-बरीं (throne) पर, तपते हुए करबल (the desert of Karbala) में मुहम्मद का नवासा
किस तरह पिलाता था वो लहू अपना वफ़ा को, ख़ुद तीन दिनों से अगरचे था प्यासा
(how he was giving his blood for your love, even though he was thirsty for three days)
दुश्मन तो बहरहाल थे दुश्मन मगर अफसोस, तुमने भी फ़रहम (provide) न किया पानी ज़रा सा
हर ज़ुल्म की तौफ़ीक़ (favourable result) है ज़ालिम की विरासत
(the good results of every oppression have been inherited by the cruel)
मज़लूम (oppressed) के हिस्से में तसल्ली न दिलासा
कल ताज सजा देखा था जिस शख़्स के सर पर, है आज उसी शख़्स के हाथ में हिक्कासा (begging bowl)
यह क्या है, अगर पूछो तो कहते हो जवाबन (in answer):
इस राज़ से हो सकता नहीं कोई शनासा (acquainted)
तुम एक गोरखधन्दा हो
हैरत की इक दुनिया हो,
तुम एक गोरखधन्दा हो
हर इक जाँ (every place) पे हो, लेकिन पता नहीं मालूम
तुम्हारा नाम सुना है, निशाँ नहीं मालूम
तुम एक गोरखधन्दा हो
दिल से अरमान जो निकल जाये तो जुगनू हो जाये,
और आँखों में सिमट आये तो आँसू हो जाये
जापे (to recite) याहू का जो भी करे, हू में खो कर
(whosoever recites the name of God with spiritual love)
उस को सुलतानियाँ मिल जायें, वो बहू (a famous poet) हो जाये
बाल बींका न किसी का हो छुरी के नीचे,
हल्के-अश्गर में कभी तीर तराज़ू हो जाये
(yet an arrow in an infant’s throat becomes the scale of justice)
तुम एक गोरखधन्दा हो
किस क़दर बे-नियाज़ हो तुम भी,
(how care-free you are)
दास्ताने-नियाज़ हो तुम भी
(such a long story you are)
तुम एक गोरखधन्दा हो
राहे तहक़ीक (on the road to inquiry) में हर क़दम पे उलझन देखूँ,
वो ही हालातो-ख़यालातों में अनबन देखूँ
(I see a discord between thought and deed)
बन के रह जाता हूँ तस्वीर परेशानी की, ग़ौर से जब भी कभी दुनियाँ का दर्पण देखूँ
एक ही ख़ाक़ पे फ़ितरत के तजादत इतने,
(there are so many contradictions in a single eye)
इतने हिस्सों में बँटा एक ही आँगन देखूँ
कहीं ज़हमत (hardship) की सुलगती हुई पतझड़ का समाँ,
कहीं रहमत (blessings) के बरसते हुए सावन देखूँ
कहीं फ़ुँकारते दरिया, कभी खामोश पहाड़, कभी जंगल, कहीं सहरा (desert), कहीं गुलशन देखूँ
खूँ रुलाता है ये तकसीम (division) का अंदाज़ मुझे, कोई धनवान यहाँ पर, कोई निर्धन देखूँ
दिन के हाथों में फ़कत (only) एक सुलगता सूरज, रात की मांग सितारों से मुज़्ज़यन (studded with) देखूँ
कहीं मुरझाये हुए फूल हैं सच्चाई के, और कहीं झूठ के काँटों पर भी यौवन देखूँ
शम्स की ख़ाल कहीं खिंचती नज़र आती है, कहीं सरमद की उतरती हुई गर्दन देखूँ
रात क्या है, ये सवेरा क्या है?
ये उजाला, ये अंधेरा क्या है?
मैं भी नाइब (deputy) हूँ तुम्हारा आख़िर,
क्यों ये कहते हो कि तेरा क्या है?
तुम एक गोरखधन्दा हो
देखने वाला तुझे क्या देखता, तूने हर रँग से परदा किया
तुम एक गोरखधन्दा हो
मस्जिद, मंदिर, ये महखाने,
कोई ये माने, कोई वो माने
इक होने का तेरे क़लील है,
(someone is convinced of your oneness)
इन्कार पे कोई माईल है
(another one leans towards negation)
इक ख़लक़ में शामिल करता है
(someone includes you with creation)
इक सब से अकेला रहता है
(someone stays aloof)
हैं दोनो तेरे मस्ताने (devotees),
कोई ये माने, कोई वो माने
सब हैं जब आशिक़ तुम्हारे नाम के,
क्यूँ ये झगड़े हैं रही्मो-राम के
तुम एक गोरखधन्दा हो
दैर में तू, हरम में तू,
(you are in every house of worship)
अर्श पे तू, ज़मीँ पे तू,
(you are in both worlds)
जिस की पहुँच जहाँ तक,
उसके लिये वहीं पर तू
तुम एक गोरखधन्दा हो
हर इक रँग में यकता हो
(you are manifest in all colours)
हर इक रँग में यकता हो,
तुम एक गोरखधन्दा हो
मरकज़े जुस्तजू, आलम-ए-रँग-ओ-बू
(you are omnipresent)
दम-ब-दम जलवागर, तू ही तू चार सू
(each moment is filled with your splendour, you are everywhere)
हू के माहोल में, कुछ नहीं इल्लाह हू
तुम बहुत दिलरूबा, तुम बहुत खूबरू
(you are the beloved, you are handsome)
अर्श की अज़मतें, फ़र्श की आबरू
(you are the glory of heavens and honour of the world)
तुम हो कोनैन का हासिल-ए-आरज़ू
(you are the fruit of the longing for two worlds)
आँख ने कर लिया, आँसुओं से वाज़ु
(our eyes are cleanse with the tears you gave)
अब तो कर दो अता, दीद का इक सबू
(at least now bestow us with your divine glimpse)
आओ पर्दे से तुम, आँख के रुबरू
(come out of the veil and in front of my eyes)
चन्द लम्हें मिलन, दो घड़ी गुफ़्तगू
(for a short meeting and a conversation)
नाज़ जपता फिरे, जो बजा कू-बा-कू
(Naaz will tell his beads from place to place, street to street)
वाहदाहू, वाहदाहू, ल-शरीक़ा लहू
(Allah is one, He has no partner)
अल्लाह हू, अल्लाह हू, अल्लाह हू
अल्लाह हू, अल्लाह हू, अल्लाह हू…………
(Allahu, Allahu, Allahu……)



